अरण्यकांड · अध्याय 16

शूर्पणखा

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अब तक की कहानी

अगस्त्य मुनि की सलाह पर राम, सीता और लक्ष्मण गोदावरी के किनारे पंचवटी में पर्णशाला बनाकर रहने लगे। जटायु ने सीता की रक्षा का वचन दिया।

पंचवटी में दिन शांति से बीत रहे थे। एक दिन राम कुटिया के बाहर बैठे थे, तभी एक राक्षसी वहाँ से गुज़री। वह थी शूर्पणखा — लंका के राजा रावण की बहन। उसके नाख़ून सूप जैसे बड़े थे, इसीलिए उसका नाम शूर्पणखा पड़ा। राम को देखते ही वह उन पर मोहित हो गई।

उसने रूप धरकर एक सुंदर स्त्री का वेश बनाया और राम के पास आकर बोली — ‘मुझसे विवाह कर लो।’ राम ने मुस्कुराकर कहा — ‘मेरा विवाह हो चुका है, ये मेरी पत्नी सीता हैं। तुम मेरे भाई लक्ष्मण से पूछो।’

शूर्पणखा लक्ष्मण के पास गई। लक्ष्मण ने भी हँसकर कहा — ‘मैं तो राम का सेवक हूँ। सेवक की पत्नी बनकर तुम्हें क्या मिलेगा? राम के पास ही जाओ।’ इस तरह वह दोनों के बीच भटकती रही। अंत में उसे लगा कि सीता के कारण ही राम उसे नहीं अपना रहे।

क्रोध में शूर्पणखा अपने असली भयंकर रूप में आ गई और सीता को खा जाने के लिए झपटी। सीता डर से काँप उठीं। राम ने तुरंत लक्ष्मण को संकेत किया। लक्ष्मण ने तलवार से शूर्पणखा के नाक और कान काट दिए। वह दर्द और अपमान से चीखती हुई वन में भाग गई।

शूर्पणखा सीधे अपने भाई खर के पास पहुँची, जो पास ही जनस्थान में चौदह हज़ार राक्षसों की सेना के साथ रहता था। रोते हुए उसने कहा — ‘दो तपस्वी राजकुमारों ने मेरी यह दशा की है। मुझे उनका रक्त चाहिए।’ यहीं से वह शुरू हुआ जो आगे चलकर लंका के युद्ध तक पहुँचा।

आज के जीवन में सीख

शूर्पणखा ने ‘ना’ को स्वीकार नहीं किया और ग़ुस्से में किसी निर्दोष पर हमला कर दिया। किसी का इनकार सम्मान से स्वीकार करना परिपक्वता की पहचान है।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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