उत्तरकांड · अध्याय 46

राम राज्य

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

श्रीराम का राज्याभिषेक हो चुका है। मित्र वानर और विभीषण विदा हो चुके हैं, और श्रीराम अयोध्या का राज संभाल रहे हैं।

श्रीराम के शासन को परंपरा में आदर्श शासन माना जाता है — इसीलिए आज भी अच्छे राज के लिए '' शब्द बोला जाता है। ग्रंथ कहते हैं कि उस समय वर्षा समय पर होती थी, खेत लहलहाते थे, और कोई भूखा नहीं सोता था।

रामचरितमानस कहता है कि राम राज्य में किसी को शरीर का, देवताओं से आया या संसार से आया कोई ताप नहीं सताता था। लोग अपने-अपने धर्म का पालन करते थे, आपस में प्रेम था, और कोई किसी से बैर नहीं रखता था।

श्रीराम केवल सिंहासन पर बैठने वाले राजा नहीं थे। वे प्रजा की बात सुनते थे और जानना चाहते थे कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। उनके लिए राजा का पहला धर्म प्रजा की भलाई था — अपना सुख उसके बाद।

वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में हनुमान जी श्रीराम से विदा लेते समय एक ही वर माँगते हैं — जब तक संसार में राम-कथा कही जाएगी, तब तक मैं धरती पर रहूँ। श्रीराम ने यह वर दिया। इसीलिए भक्त मानते हैं कि जहाँ राम-कथा होती है, वहाँ हनुमान जी रूप में उपस्थित रहते हैं।

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥

राम राज्य में शारीरिक, दैवी और सांसारिक — तीनों में से कोई भी ताप किसी को नहीं सताता था।

— श्रीरामचरितमानस, उत्तरकांड

आज के जीवन में सीख

नेतृत्व का मतलब अधिकार नहीं, ज़िम्मेदारी है। चाहे घर हो, क्लास हो या टीम — अच्छा नेता पहले दूसरों का भला सोचता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटवाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म

सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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