लंकाकांड · अध्याय 42

रावण वध

पढ़ने का समय 5 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया है। कुंभकर्ण भी मारा जा चुका है। अब रावण स्वयं अंतिम युद्ध के लिए निकला है।

पुत्र और भाइयों को खोकर रावण क्रोध की आग में जल रहा था। वह अपने सबसे बड़े रथ पर बैठकर युद्ध-भूमि में आया। श्रीराम धरती पर खड़े होकर लड़ रहे थे। यह देखकर देवराज इंद्र ने अपना दिव्य रथ और सारथी श्रीराम के लिए भेज दिया।

युद्ध बहुत लंबा चला। वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब श्रीराम थके और चिंतित दिखे, तब अगस्त्य ऋषि वहाँ आए और उन्हें स्तोत्र सिखाया — सूर्य देव की स्तुति। श्रीराम ने उसका तीन बार पाठ किया और नए उत्साह से युद्ध में लौटे।

श्रीराम जितनी बार रावण का सिर काटते, नया सिर उग आता। रामचरितमानस के अनुसार तब विभीषण ने भेद बताया — रावण की नाभि में अमृत है, जब तक वह है, रावण नहीं मरेगा। वाल्मीकि रामायण में श्रीराम ने अगस्त्य जी का दिया ब्रह्मास्त्र चलाया, जो रावण की छाती भेद गया।

बाण लगते ही रावण अपने रथ से धरती पर गिर पड़ा। देवताओं ने आकाश से फूल बरसाए, वानर सेना ख़ुशी से नाच उठी। जिस अहंकार ने तीनों लोकों को डराया था, उसका अंत हो गया।

पर श्रीराम ने विजय पर घमंड नहीं किया। जब विभीषण ने भाई का अंतिम संस्कार करने में संकोच किया, तो श्रीराम बोले — मृत्यु के साथ बैर समाप्त हो जाता है। रावण वीर और विद्वान था, उसका सम्मान से संस्कार करो। मंदोदरी के विलाप ने सबकी आँखें नम कर दीं। फिर विभीषण लंका के राजा बने।

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्। रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥

युद्ध से थके हुए, चिंता में डूबे श्रीराम ने देखा कि रावण फिर युद्ध के लिए सामने खड़ा है।

— वाल्मीकि रामायण, युद्धकांड — आदित्य हृदय स्तोत्र का पहला श्लोक

आज के जीवन में सीख

थकान और चिंता बड़े से बड़े को घेर लेती है; तब सही मार्गदर्शन और प्रार्थना नई शक्ति देते हैं। और जीत के बाद भी शत्रु का सम्मान करना महानता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटसीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा

सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार