बालकांड · अध्याय 5

सीता स्वयंवर और शिव धनुष

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

राम के आने से अहल्या श्राप से मुक्त हुईं। अब विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण राजा जनक की नगरी मिथिला पहुँचे हैं।

राजा जनक बड़े ज्ञानी और धर्मात्मा राजा थे। एक बार यज्ञ के लिए भूमि जोतते समय हल की नोक से धरती में से एक नन्ही कन्या निकली। जनक ने उसे बेटी की तरह अपनाया और नाम रखा सीता। इसीलिए सीता को ‘जानकी’ (जनक की बेटी) और ‘भूमिजा’ (धरती की बेटी) भी कहते हैं।

जनक के पास भगवान शिव का विशाल धनुष था, जिसे कहते हैं। उन्होंने प्रण किया था कि जो इस धनुष पर डोरी चढ़ा देगा, उसी से सीता का विवाह होगा। श्रीरामचरितमानस के अनुसार इसके लिए रखा गया, जिसमें दूर-दूर के राजा आए। स्वयंवर से पहले जनक की पुष्प-वाटिका में राम और सीता ने पहली बार एक-दूसरे को देखा, और सीता ने माँ गौरी से राम को पति रूप में पाने की प्रार्थना की।

स्वयंवर के दिन एक-एक करके बड़े-बड़े राजा उठे। किसी से धनुष हिला तक नहीं। आख़िर जनक दुखी होकर बोले — ‘लगता है धरती वीरों से ख़ाली हो गई है।’ यह सुनकर लक्ष्मण को क्रोध आया, पर राम ने उन्हें शांत किया।

तब गुरु विश्वामित्र ने संकेत किया — ‘राम, उठो और धनुष चढ़ाओ।’ राम ने गुरु को प्रणाम किया और सहजता से धनुष के पास पहुँचे। उन्होंने उसे ऐसे उठाया जैसे कोई फूल की माला उठाता है। जैसे ही डोरी खींची, धनुष बीच से टूट गया और उसकी गड़गड़ाहट से तीनों लोक गूँज उठे।

सीता ने आगे बढ़कर राम के गले में डाल दी। जनक ने अयोध्या संदेश भेजा, और राजा दशरथ बारात लेकर मिथिला आए। राम-सीता के साथ ही लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से, भरत का मांडवी से, और शत्रुघ्न का श्रुतकीर्ति से हुआ। मिथिला और अयोध्या दोनों में अपार आनंद छा गया।

आज के जीवन में सीख

जब बड़े-बड़े राजा अपनी शान दिखा रहे थे, राम ने गुरु की आज्ञा का इंतज़ार किया। असली ताक़त के साथ विनम्रता हो, तो वह और सुंदर लगती है।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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