लंकाकांड · अध्याय 39
लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
अब तक की कहानी
युद्ध शुरू हो चुका है। गरुड़ ने श्रीराम और लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त किया, और श्रीराम ने निहत्थे रावण को लौट जाने दिया।
रामचरितमानस के अनुसार एक दिन मेघनाद और लक्ष्मण का भयंकर युद्ध हुआ। जब मेघनाद हारने लगा, तो उसने एक दिव्य चलाई। वह लक्ष्मण की छाती में लगी और वे बेहोश होकर गिर पड़े। (वाल्मीकि रामायण में यह शक्ति रावण ने चलाई थी।)
श्रीराम लक्ष्मण का सिर गोद में रखकर रो पड़े — जिस भाई ने मेरे लिए महल छोड़ा, उसके बिना मैं अयोध्या कैसे लौटूँगा? तब लंका के वैद्य सुषेण बुलाए गए। उन्होंने कहा — हिमालय में द्रोणगिरि पर्वत पर बूटी है। सूरज उगने से पहले वह आ जाए, तो लक्ष्मण बच सकते हैं।
यह काम केवल हनुमान जी कर सकते थे। वे तुरंत उड़ चले। रामचरितमानस बताता है कि रावण ने रास्ते में कालनेमि नाम के मायावी राक्षस को साधु बनाकर बिठाया था, ताकि हनुमान जी देर कर दें। हनुमान जी ने उसकी चाल पहचान ली और उसका अंत कर दिया।
द्रोणगिरि पर बहुत-सी जड़ी-बूटियाँ चमक रही थीं। हनुमान जी पहचान नहीं पाए कि संजीवनी कौन-सी है। समय कम था, इसलिए उन्होंने पूरा पर्वत ही उठा लिया और आकाश में उड़ चले।
लौटते समय अयोध्या के पास नंदीग्राम में भरत ने आकाश में किसी बड़े जीव को देखा और बाण चला दिया। हनुमान जी 'राम' कहते हुए नीचे गिरे। भरत ने सारी बात सुनी तो दुखी हुए और अपने बाण पर बिठाकर उन्हें तेज़ी से भेजने की पेशकश की। हनुमान जी समय रहते पहुँचे, सुषेण ने औषधि दी, और लक्ष्मण उठ बैठे। श्रीराम ने हनुमान जी को गले लगा लिया।
आज के जीवन में सीख
जब समय कम हो और रास्ता साफ़ न दिखे, तो छोटी उलझनों में मत फँसिए — पूरा हल लेकर आइए। और सच्चा भाई-प्रेम दूरी नहीं देखता।
सभी अध्याय
- 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
- 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
- 3विश्वामित्र और ताड़का वध
- 4अहल्या का उद्धार
- 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
- 6परशुराम का क्रोध
- 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
- 8कैकेयी के दो वरदान
- 9राम का वनवास
- 10केवट का प्रेम और गंगा पार
- 11राजा दशरथ का देहांत
- 12भरत का प्रेम और त्याग
- 13भरत मिलाप और राम की पादुका
- 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
- 15दंडक वन से पंचवटी तक
- 16शूर्पणखा
- 17खर-दूषण का वध
- 18मारीच और सोने का हिरण
- 19सीता हरण
- 20जटायु का बलिदान
- 21शबरी के बेर
- 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
- 23सुग्रीव से मित्रता
- 24बाली वध
- 25सीता की खोज और संपाती
- 26समुद्र लाँघने का निश्चय
- 27सुरसा और सिंहिका
- 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
- 29अशोक वाटिका में माता सीता
- 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
- 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
- 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
- 33लंका दहन
- 34चूड़ामणि लेकर वापसी
- 35विभीषण की शरणागति
- 36राम सेतु का निर्माण
- 37अंगद बने शांति-दूत
- 38युद्ध का आरंभ
- 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
- 40कुंभकर्ण
- 41मेघनाद वध
- 42रावण वध
- 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
- 44अयोध्या वापसी
- 45श्रीराम का राज्याभिषेक
- 46राम राज्य
- 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
- 48लव-कुश ने गाई रामायण
- 49सीता जी का धरती में समाना