लंकाकांड · अध्याय 41

मेघनाद वध

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

कुंभकर्ण श्रीराम के हाथों मारा गया है। रावण का अब सबसे बड़ा सहारा उसका पुत्र मेघनाद है।

मेघनाद ने एक और चाल चली। वाल्मीकि रामायण के अनुसार वह रथ पर माया से बनी सीता जी की एक नकली आकृति लेकर आया और सबके सामने उस पर तलवार चला दी। हनुमान जी और वानर सेना यह देखकर टूट गए। श्रीराम भी यह ख़बर सुनकर मूर्च्छित हो गए।

तब विभीषण आए और बोले — प्रभु, यह सब है। रावण सीता जी को कभी मरने नहीं देगा। मेघनाद हमें दुख में डालकर निकुंभिला नाम के स्थान पर एक करने गया है। अगर वह यज्ञ पूरा हो गया, तो उसे कोई नहीं हरा पाएगा। उसे अभी रोकना होगा।

श्रीराम ने लक्ष्मण को भेजा। साथ में विभीषण, हनुमान और वानर वीर गए। उन्होंने यज्ञ-स्थल पर हमला किया और यज्ञ पूरा नहीं होने दिया। क्रोधित मेघनाद बाहर निकला और लक्ष्मण से युद्ध करने लगा। उसने विभीषण को भी कड़वे शब्द कहे — अपने ही कुल का भेद शत्रु को बताते हो!

लक्ष्मण और मेघनाद का युद्ध बहुत लंबा और भयंकर था। दोनों ने दिव्य अस्त्र चलाए। अंत में लक्ष्मण ने एक बाण चढ़ाया और कहा — अगर श्रीराम धर्मात्मा हैं और सत्य पर अडिग हैं, तो यह बाण मेघनाद का अंत करे। बाण चला और मेघनाद का सिर कटकर धरती पर गिर पड़ा।

देवताओं ने फूल बरसाए। वानर सेना में जय-जयकार होने लगी। लक्ष्मण घायल होकर लौटे तो श्रीराम ने उन्हें गले लगा लिया। उधर लंका में रावण पुत्र-शोक से पागल-सा हो गया। अब उसके पास कोई नहीं बचा था — केवल वह स्वयं।

आज के जीवन में सीख

डर और दुख में हम अक्सर माया को सच मान लेते हैं। ऐसे समय में एक शांत, सच्चा साथी — जैसे विभीषण — सबसे बड़ी ताक़त है।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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