सुंदरकांड · अध्याय 26

समुद्र लाँघने का निश्चय

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

रावण माता सीता को लंका ले गया है। सुग्रीव ने वानरों को चारों दिशाओं में खोज के लिए भेजा है। दक्षिण की टोली समुद्र तट पर पहुँची है।

सीता जी की खोज में निकली वानर सेना दक्षिण समुद्र के किनारे पहुँच चुकी थी। सामने सौ योजन चौड़ा समुद्र था, और लौटने की समय-सीमा भी बीत रही थी। सब उदास बैठे थे — कौन इतना बड़ा समुद्र पार कर सकता है?

अंगद, नील, जामवंत — हर कोई अपनी सीमा बताने लगा। कोई कहता दस योजन, कोई बीस। पर हनुमान जी चुपचाप एक ओर बैठे थे, जैसे यह प्रश्न उनके लिए था ही नहीं।

तब बूढ़े और अनुभवी उनके पास आए। उन्होंने याद दिलाया कि बचपन में हनुमान ने सूर्य को फल समझकर पकड़ने के लिए छलाँग लगा दी थी। ऋषियों के श्राप के कारण हनुमान अपनी शक्ति भूल गए थे — और उन्हें याद दिलाने वाला कोई चाहिए था।

जामवंत के शब्द सुनते ही हनुमान जी का शरीर पर्वत के समान बढ़ने लगा। उनके भीतर का जाग उठा। उन्होंने महेंद्र पर्वत पर चढ़कर श्रीराम का नाम लिया और आकाश में छलाँग लगा दी।

कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥

हे तात, संसार में ऐसा कौन-सा कठिन काम है जो तुमसे न हो सके?

— श्रीरामचरितमानस, किष्किंधाकांड

आज के जीवन में सीख

कभी-कभी हमें अपनी ताक़त याद दिलाने के लिए किसी जामवंत की ज़रूरत होती है। और कभी हमें किसी और का जामवंत बनना होता है।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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