लंकाकांड · अध्याय 44

अयोध्या वापसी

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

अग्नि परीक्षा के बाद श्रीराम और सीता जी फिर एक हैं। चौदह वर्ष का वनवास पूरा होने वाला है।

विभीषण ने श्रीराम को भेंट किया — वही विमान जो रावण ने कुबेर से छीना था। श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, सुग्रीव, हनुमान, विभीषण और कई वानर वीर उसमें सवार हुए और आकाश मार्ग से अयोध्या की ओर चल पड़े।

रास्ते में श्रीराम सीता जी को एक-एक जगह दिखाते रहे — यह रहा राम सेतु, यहाँ रावण गिरा, यह किष्किंधा है जहाँ सुग्रीव से मित्रता हुई, और यह पंचवटी, जहाँ से तुम्हारा हरण हुआ था। चौदह वर्ष की यादें नीचे से गुज़र रही थीं।

श्रीराम प्रयाग में भरद्वाज ऋषि के आश्रम में रुके और हनुमान जी को आगे भेजा। रामचरितमानस के अनुसार भरत ने प्रण किया था कि अगर चौदह वर्ष पूरे होने पर भाई न लौटे, तो वे प्राण त्याग देंगे। अवधि का आख़िरी दिन था, और भरत बहुत व्याकुल थे।

नंदीग्राम में हनुमान जी ने भरत को समाचार दिया — श्रीराम आ रहे हैं! भरत ख़ुशी से रो पड़े और हनुमान जी को गले लगा लिया। जब पुष्पक उतरा, तो भरत ने श्रीराम के चरणों में वही रख दीं जिन्हें चौदह वर्ष सिंहासन पर रखकर उन्होंने राज्य चलाया था।

श्रीराम सबसे पहले माता कैकेयी से मिले, फिर कौशल्या और सुमित्रा से। पूरी अयोध्या सजी हुई थी। परंपरा कहती है कि प्रभु के लौटने की ख़ुशी में लोगों ने घर-घर दीप जलाए — और भक्त आज भी दीपावली पर उसी उजाले को याद करते हैं।

आज के जीवन में सीख

भरत ने सत्ता पाकर भी उसे अपना नहीं माना — सच्ची वफ़ादारी यही है। और श्रीराम सबसे पहले कैकेयी से मिले, यानी मन में कोई कड़वाहट नहीं।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटश्रीराम का राज्याभिषेक

सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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